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चतरा बकावली
(1932)
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1. राजिंदर रिमझिम, झुम-झुम सननन, ना देवें नादिर जरसीम जानना (पंजाबी में)
2. क्या सुहाए रंग जो मोरा रंग, मोरे रंग से है खिल रह्यो हर रंग
3. अय रंगी रंगे तू रंगत नित रंग, राग रंगत कहो चमक दुनिया में कौन आला
4. आदम में ये सिफ़त सुना के, राजा के गुलशन में पसंद आई हूं
5. दूर दूर ओ नारी नाकारी, आजा री बाज़ारी दूर दूर
6. चंद-ए-माहताब डूबी गंदे तालाब में, अलखमान अलखमान, कान्हो सुन इलजाम
7. यारब हाल भूल जावें इश्क़ किया क्यूं तूने पैदा
8. कोई लेना बेग ख़बरिया, जिया मोरा सताए इंसां
9. ओ बद्कार ओ मग़रूर ओ बदनाम ओ बेनूर, दूर दूर यहां से दूर
10. कोई हाल कहो जाके मेरी परी को समझा के, अय पंख पखेरू उड़े फिरे
11. हिलमिल रूमझूम करो जी सैर, देखना भालना क़ुदरत बहार
12. दिल जानी को पाए ख़ुदाया, चेरा तेरा कैसे बार बलम पे उड़ाके सर पे
13. अजब नहीं अक्सीर तुम्हारी, ख़ाक़ हो चाहे ज़र कर दे
14. ऐ पीर-ए-जिशान इस अहसान पे क़ुर्बान दिलोजान
15. मैं बेचारी दुखभरी दुखियारी दुखभरी ये नैन, अंधियारे पाती रही उजियारे दिन रैन
16. मोरा मन लागे धड़कन रे, न मालूम क्यों डरत मेरी जान
17. प्यारे जाओ रैन बाक़ी थोड़ी है, बैरी आयो रे सवेरा, आन ग़मों ने दिल घेरा
18. मुझे नादान तू ऐ जान न जान, प्यारी कहना मान कहना मान कहना मान
19. हम दिल किसी परी से न हरगिज़ लगाएंगे
20. बाद-ए-बहारी आ के पुकारी गुल की सवारी आती है
21. सुइयां काहे पइयां तोड़े छइयां प्यारी छोड़
22. इश्क़ कहते आए हैं शायद किसी ख़ंजर का नाम
23. कोई दुनिया में निराला नहीं मदों से हय बाला
24. अजी औरत से निराली नहीं गुलज़ार में बाली
25. जो तूं गुन समझत सुन हमरी मोरी सखी जैसा
26. पियरवा प्यारी मन भावो री, हम चलेंगे ज़रूर हुज़ूर तलक पल में
27. जब के क़लंदर बन फिर कर बंदर लेकर आते है
28. किस भोले भाले देश के रहने वाले हो तुम भोले भाले
29. कहां तुम्हारी दुपटिया, कहां हमारी शॉल, कहां ज़रा सी रूमलिया
30. तुम्हारे कौल से साबित हैं औरतें कंगाल, मगर कामिन की ख़ातिर
31. ऐ धोखा देने वाले मैंने लाखों देखे भाले, ऐसी चालाकी से जानेवाले
32. बोल रिझा ले तेरे मुंह में पड़े छाले, तुझे डसें सांप काले यह दुआ कर
33. समझ गवारी तुझे गधे की सवारी, तेरी बढ़े ये बीमारी
34. अरी सखी सावन आयो बरखा ऋतु आगमां, नयना तपत है प्राण प्यारे
35. उरुज़ मर्ग पे जो दिल निसार करते हैं, लिपट के ख़ंजर-ए-क़ातिल को प्यार करते हैं
36. जहां के बशर बने मुंशी, ये धरती सारी बने तख़्ती
37. न बोलो तारा तारा वह तारा है न्यारा, न बोलो तारा तारा
38. जय बोलो खुशी के दम की रथ भागी हमारे ग़म की
39. लो चोरी खुली तुम्हारी देव सवारी करके
40. अजी हाल सुनो मेरे जी का, मैं चेला हूं इक देवी का
41. देवी को मनाऊं बतियां यूं सारी आज निबट गई
42. वो देवी तोरे द्वार शाही दरबार पूजन भजन कारन आए
43. तुम कौन बशर हो कहां से आए हो ऐ आदमजाद
44. आशा सारी जी की पूरन जाते हों, जैसा चेरा तोरा ताज चेरी मोहे कीजे
45. या करिमना या रहिमना मोरा नादिर, गुलबदन था जो संग
46. मैं दुखिया नहीं आई भाई रे, शान-ए-ख़ुदाई मोहे खींच लाई
47. वह फूलवाली परी देख लो जरी मेरी जान छूटी
48. कोई रब की मरजी क्या जाने, दुनिया मतलब अपना जाने
49. है रब की शान बड़ी लैला मन मोहे खड़ी
इंद्रसभा
(1932)
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1. परवरदिगार तू कारसाज़ बेनियाज़, दामन को भर दे अपनी रहमत से (स्तुति गान)
2. किस तरह ज़प्त मैं करूं, पहलू से निकला जाए दिल
3. आओ गुइयां मिल गाएं गाएं, मदन मोहन को रिझाएं (सहगान)
4. तूने तो मोरा मन हर लीनो मोरे बांके सांवरिया
5. छल्ला हमारा याद रखना, याद रखना, यह पास रखना
6. राजा हूं मैं कौम का इंद्र है मेरा नाम, बिन परियों की दीद के
7. गाती हूं मैं और नाच सदा काम है मेरा, आफ़ाक में पुखराज परी नाम हे मेरा (महिला स्वर)
8. सांवरिया से हम संग नाहीं बनी रे, हां नाहीं बनी रे (महिला स्वर)
9. ख़ूब रिझाया नाच के, गा के, पहलू में मेरे बैठ तू आ के
10. हूरों के होश उड़ते है उटने की शान पर, नीलमपरी है नाम मेरा
11. ज़रा नैनों का कर दो इशारा मेरी जान, तेरी तिरछी निगाहों ने मारा
12. दिखा चुकी तू करतब सारे, पहलू में अब आ बैठ हमारे
13. इंसां का काम हुस्न पे मेरे तमाम है, जोड़ा है सुर्ख लालपरी मेरा नाम है
14. महाराज से नेहा लगैबे, हमार कोई का करिबे
15. कटी रात मजे में सारी, बैठ मेरे पहलू में प्यारी
16. मामूर हूं, शोख़ी से शरारत से भरी हूं, धानी मेरी पोशाक है मैं सब्ज़परी हूं
17. कब से खड़ी हूं तोरे द्वारा, बुला ले मोहे बालम रे
18. राजा जी तो सो गए दिया न कुछ इनाम, जाती हूं मैं बाग़ में यहां मेरा क्या काम (पूरा गीत)
19. सुन रे काले देव रे तू मेरी इक बात, आती थी राजा के घर मैं आज की रात
20. घर में राजा के तू है सब परियों की सरदार, तुझसे कर सकता नहीं हरगिज़ मैं इन्कार
21. जा तू संगल द्वीप अख़्तर नगर में हां, सोता है एक माहरू लाल महल पर वहां
22. क्या तड़पने का मज़ा जब दिलरुबा परदे में हो, उस मर्ज़ की क्या दवा
23. लाया हूं शहज़ादे को मैं जाकर हिंदुस्तान, तू अपने माशूक़़ को ऐ सब्ज़परी पहचान (पूरा गीत)
24. यही है शहज़ादा मेरा यही है मेरी जान, यही मेरा दिलदार है
25. घर से यहां कौन ख़ुदा के लिए लाया मुझको, किस सितमगर ने सोते से जगाया मुझको
26. मुझे कौन घर से लाया यहां, बताओ यह किसका हैगा मकां
27. देखो तुम मेरी तरफ़ घर का मत लो नाम, लौंडी मुझको जान के करो यहां आराम
28. खिलवत में मैं रहता हूं और ऐश है मेरा काम, शहज़ादा हूं मैं हिंद का
29. सर पे, आंखों पे, कलेजे पे बिठाऊं तुझको, आ मेरे पास गले से लगाऊं तुझको
30. वस्ल की तेरी क़सम, घर में है जाना मुझको, न ख़बरदार कभी हाथ लगाना मुझको
31. ज़िंदगी का है मज़ा ऐसी मुलाक़ातों में, चोंचले मुझसे बघारो ना ज़रा बातों में
32. घर के छूटने का है ग़म आहों फुगां करता हूं, वस्ल का वादा मैं एक शर्त से हां करता हूं
33. ऐसी बातों का ज़बां पर लाना नहीं अच्छा, जान आफ़त में नहीं मुफ़्त फ़ंसाना अच्छा
34. मैं न मानूंगा कभी बात तेरी, काम किस रोज़ ये आवेगी मुलाक़ात
35. बात हरगिज़ यह ज़बां से न निकालो साहब, होश में आओ ज़रा
36. दिल हर एक शख़्स का फंदे में फंसाती है तू, ऐ परी क्यों मुझे बातों में उड़ाती है तू
37. मुफ्त की यार ख़राब अपनी जवानी तूने, हाय अफ़्सोस मेरी बात न मानी तूने
38. किस तरह चलने पे तैयार मेरी जां हूं मैं, तू परीज़ाद है चालाक और इंसां हूं मैं
39. बहकी बातें न करो होश में आओ जानी, न परीजाद से बेपर की उड़ाओ जानी
40. महाराज किवड़िया खोल रस की बूंदें पड़े मोरे राजा (सहगान)
41. सुन जानेमन हमारी जानी न कहूं क्या कहूं, तेरे हाथ में गिलोरी बिडिया (सहगान)
42. चमन को यूं मेरे साक़ी ने मयख़ाना बना डाला, कली को शीशा-ए-मय
43. मोरी अखियां फड़कन लागी, कहां गयो यार किधर गई सखियां
44. न कर लालदेव इस तरह से कलाम, अरे बेमुरव्वत ज़बां अपनी थाम
45. अरे देव तू है यह क्या कह रहा, मेरे बाग़ में काम इंसां का क्या
46. अरे कौन है तू तेरा क्या है नाम, सभा मेरी की तूने बरहम तमाम
47. कहूं क्या फ़लक का सताया हूं में, यहां खेल कर जी पर आया हूं मैं
48. अरे ओ परीसब्ज़ ओ बेहया, मेरे सामने जल्द आ बेसवा
49. राजा जी न करो ज़ुल्म ये, ख़ता हुई बेशक़ बड़ी ये
50. जफ़ा-ओ-सितम की सज़ावार हूं, हक़ीक़त में तेरी गुनहगार हूं
51. अरे देव कर कस्द बेदाद का, पकड़ हाथ इस आदमी जात का
52. सुरतिया दिखाए जावो रे बांके छैला, सुरतिया दिखाओ
53. किसी से दिल को लगा के हमने, अजब तरह का अज़ाब देखा
54. बांध के मुश्कें मेरी जब कुव-ए-दिलबर ले चला, सांप के मुंह में मेरा
55. मैं तो शहज़ादे को ढूंढ़न चली यां, अंग भभूत जोगन बन मलिया
56. नाला दिलगीर नहीं, आह में तासीर नहीं, अब तो मिलने की भी उनसे कोई तदबीर नहीं
57. दिल दे दिया है उनको देखें वह क्या करेंगे (सहगान)
58. ख़ुदा राजा को रखे शादमां, जो जान बक्शी तो खोलूं ज़बां
59. न कर देर ऐ देव बहर ख़ुदा, अखाड़े में मेरे उसे जल्द बुला
60. अरी जोगन अब दिल में हो अपने शाद, किया है तुझे राजा इंदर ने याद
61. यह बातें न लाना ज़बां पर कभी, फ़क़ीरों से अच्छी नहीं दिल्लगी
62. महाराज की जय इधर अब निगाह, यह जोगन है हाज़िर बहाले तबाह
63. अरी जोगन ऐ दर्द की मुब्तिला, फ़क़ीरों का क्यों भेष तूने किया
64. महाराज पूछो न जोगन का हाल, फ़क़ीरों का दिल दर्द से है निहाल
65. कहां गए गुइयां शहज़ादा जानी प्यारा, दिल तड़पे रे हमारा
66. होता है कोई आन में अब काम हमारा, इनाम में अब दीजिए गुलफाम हमारा
67. अरे लालदेव इस तरफ़ जल्द आ, बड़ा मुझको जोगन ने धोखा दिया
68. कहर था हिज्र कयामत थी जुदाई तेरी, मेरे ख़ालिक़ ने मुझे शक्ल दिखाई तेरी (पूरा गीत)
69. शादिए जलवए गुलफ़ाम मुबारक होवे, ऐशो-अशरत का सरंजाम मुबारक होवे (सहगान)
भक्त के भगवान
(1934)
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1. आओ, आनंद मंगल गाओ, फूल सखी जय के बरसाओ (सहगान)
2. धन्य धन्य महाराज राजा श्रीयाल दानी, दान ज्ञान भक्तिवान
3. ओ मृगनयनी मेरी तरफ़ निहार
4. तुम प्राण के प्यारे सहारे मेरे, नवजीवन ज्योति जगा देना
5. जय जय कैलाशपति शंकर त्रिपुरारी, सोहत सिर चंद्रभाल
6. छाई घटा कारी अंधियारी, डूब गई सगरी उजियारी
7. तुम सब मिल कर आओ गाओ, हरी गुन को आज
8. सोच करो मत मेरी माता देदो बिदा का दान
9. जगदाधार पालनहार अकलित लीला प्रभू तुम्हारी
10. दया कर जागो दीनदयाल, गाज गिरि दुख की सिर ऊपर
11. बाल लाल गयो मेरो जीवन जग भयो अंधेरो
12. तुम्हीं हो भक्त के भगवान, सुर नर मुनिवर जपत निरंतर (शीर्षक गीत) (सहगान)
ग़रीब की दुनिया
(1934)
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1. भगवान सदा दुख हरते हैं परगट होकर कमज़ोरों में
2. दुनिया है मतलब की, सबको है मोह लोभ ने घेरा
3. भारत की नैया पार उतारो, देश का दुख टारो (सहगान)
4. दिल ज़ुल्फ़ के फंदे में गिरफ्तार न हो जाए (सहगान)
5. रंग भीनी चुंदरिया भीगी जात, मोरी छलके गगरिया
6. कह दो कोई धनवानों से हम भी दुनिया में बसते हैं (सहगान)
7. कुछ अजब रंग है साक़ी तेरे मैख़ाने का, दिल में आता है कि मुंह चूम लूं पैमाने का
8. सेजरिया ना सोहाय कटे नहीं रतियां, सांवरिया मोरे आओ
9. विधाता मैं कैसी अभागन बनी हूं, मैं दुखी पे सदा दुख के कारण बनी हूं
10. आज जगत में शुभ घड़ी आई, सुख का संदेशा लाई (सहगान)
11. माया का घरौंदा टूट गया, अबला का नसीबा फूट गया
12. बहन को डसने वाले और पिता के जेल कारण, यही वो सांप बिच्छू है
13. मोहन बंशीवाले निराले मतवाले, ओ गोकुल के ब्रजवाले
इंसाफ़ की तोप
(1934)
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1. जड़ चेतन गुण दोषमय विश्व कीन्ह करतार
3. धन्य भारत के वे बलिदान, आन में धर्म जाति और देश के कारण दिये जिन्होंने प्राण
4. मैं भंवरा उस फूल का भूल गया सब ठौर, मैं चाहूं तब दरश को
5. आई लक्ष्मी न गंवाओ हे मैया मोरे, युगल नटखट किये लटपट
6. बिछुड़ा री घाली पीहर चाली सा चाली जा
7. शिकारी बन के गए तुम शिकार करने को, हुए शिकार ख़ुद-ब-ख़ुद ये आह भरने को
8. मैं हूं पतंग तुम दीप शिखा
9. ज़रा ठहरो हमारे सांवरिया रे
10. वे सवेरे चला जाएं राती रह जा तूं (पंजाबी में)
11. तू मालदार कंगला हूं मैं, रूह एक तस्वीरें दो
12. कैसी प्रीत निभाई सुधहूं मोरी बिसराई
13. जा दिन से सैयां मोर छोड़े ललटवा (नृत्यगान)
14. हरि-हरि जपना रे पराया माल अपना रे
15. जाग मछंदर गोरख आया
16. चली आओ हुसनिया छम-छम
17. शुभ घड़ी आई सब मिल के गाओ बधाई (सहगान)
रामायण
(1934)
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1. श्री रामचंद्र कृपालु भज मन हरण भव भय दारुनं (प्रार्थना)
2. यह दुनिया इक फुलवारी है, रंग-रंग के फूल खिले हैं (सहगान)
3. जय जय कमलधारिणी विनय सुनु, भगवति राखहु लाज हमारी
4. पिया नहीं आए, छिन छिन उन्मत्त कान बजत, अंखियां मग में
5. सखी कैसी अजब छाए रही चांदनी, रसीली रात है बहार की (सहगान)
6. जग चार दिनों का मेला है, तन मन धन सब छोड़ के तुझको इक दिन जाना अकेला
7. सखी री, मोहे जल भरने को जाना
8. हे अभागिन! रो तेरा संसार सूना हो गया, तेरा जीवन शोक का उदभुत नमूना
9. गर्व करे क्यों मूरख रावण छिन भर में मिट
10. जाग-जाग क्यों मूरख बंदे सोया चादर तान, साधु की सेवा कर बाबा
11. कारी बदरिया छाई गगन में, बिजली चमके मेंह बरसे घनघोर (सहगान)
12. भूल गए क्यों अवध बिहारी, मेरे प्राणधार तुम्हीं हो
13. सखी मैं जागी सारी रात, पिया जोबन का लोभी (सहगान)
बलिदान
(1935)
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1. विधाता कैसा खेल खिलाता, इस जग के सुंदर उपवन में
2. खुशी से फूल रहे हैं फूल, या कि स्वर्ग की दुनिया में कुछ प्रेमी
3. सुन री चमेली, चतुर अल्बेली, सासू के घर जाना री होगा
4. तेरा बीमार-ए-बिस्मिल इस तरह मक़तल में आया था
5. मेरे दिल से कोई पूछे मेरे दुख की कहानी को, तो मेरे मुंह से निकलेगा
6. ऐ जान, तेरे हिज्र में ज़िंदा रहूंगी मर जाऊंगी बला से पर दम तेरा भरूंगी
7. सो जा सो जा मेरे बच्चे, अपनी मां के सुंदर सच्चे, उठकर सुबह धोय कर नैना
8. मनुआ राधाकृष्ण बोलो, मन में अमृत रस को धोलो
9. पी लो शराब मज़ेदार, ऐ यारो पी लो शराब मज़ेदार
10. है प्रेम का पंथ निराला, है निराला, है निराला, है निराला
11. दर्द-ए-दिल क्या मैं कहूं कैसी है हालत मेरी, दर्दमंदों की ये कहानी
12. सदाचार व्रत धार लो अबलाओ बहन, मेरी प्यारी बहन
13. रे लोगो, दुनिया एक बाज़ार, पाप पुण्य की खुली दुकानें बिधना बेचनहार
14. जागो जागो भारतवासी, एक दिन तुम थे जंगद्गुरु जग था उन्नत अभिलाषी
डाकू का लड़का
(1935)
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1. बोल मैना मीठी बानी बोल, कुछ तो मरम हिये का खोल
2. क्या नन्हीं सी फुलवारी थी, सरसब्ज़ हमारी बारी थी
3. हमारी ज़िंदगी का कोई रहनुमा न रहा, सजा सजाया मेरा
4. भर भर के जाम शराब के पिला दे साक़ी, पी के पिला के हमें मस्त
5. फिर तीर-ए-नज़र से छेद जिगर, फिर आंख मिला बिस्मिल कर दे
6. छोड़ सोहन हलवा मोहन भोग का, ऐ सजन, घंस जा रसोबोलाई में (पूरा गीत)
7. कासिद को उस तरफ़ था बमिन्नत किया रवां, मसरूफ़ इंतज़ार में
8. जी भर के इसको दौलतो-ज़र देके देख लो, जो इसका घर भरे
9. खिलवते जाना है पहली रात है, बात बन जाए तो अपनी बात है
10. ग़ैर मौजूद नहीं रश्क किसे हो शब-ए-वस्ल, शमा को सामने रख
11. किया दिलबर ने दिल का शिकार, आंखें दोधारी कटार, हुआ तिरछी
12. पी लो न सताओ मेरी जान, ऐ रश्क-ए-कमर, जानो जिगर प्यारी
13. नयना लड़ाके मैं मर गई हो हो नयना लड़ाके, हिरदे बरछी उतर गई हो हो
14. तेरी मेरी जोड़ी सदा रक्खे सलामत ख़ुदा, मैं हूं दामन तू है चोली
15. उनको आंचल में देखा मचलते हुए, रह गए सबके साथ हाथ मलते हुए
16. बालमा आओ आओ दिलदार, नयना मिलाओ मोहे गरवा लगाओ, रसीले ओ सइयां
दिल की प्यास
(1935)
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1. राजा जानी न मारो नयननवा के तीर रे, रोकत टोकत-हार गई मैं (सहगान)
2. आज से यह गाल पिता का और यह गाल तुम्हारा, यह भी मीठा
3. दुनिया क्यों समझी है अमृत, आग भरी है बोतल में
4. जो कि होना आश्नाए दर्द-ए-दिल, दर्द-ए-दिल, कि सुना क्या माजराए
5. जगत जननी जगदंब भवानी, कृपा करनि दुख हरनि सुख करनि
6. मात पिता के नाम से बढ़कर मीठा प्यारा नाम नहीं, इनसे बढ़कर नहीं है
7. काहे मोरी सुध बिसराई, किस अपराध पे भूल गये मोहे
8. पिया को ढूंढ़त हैं यह नैन, रो-रो कटत है दिन रैन, कैसे आए मोरे मन को चैन (पूरा गीत)
9. तेरी ज्वानी को शरनाटो छोरा लै बैठैगो मोय (मारवाड़ी में)
10. अरे सुन सखी दिल लगाना, बुरा है, किसी से मुहब्बत जताना बुरा है (सहगान)
11. देश फल को छोड़ कर जो खाते हैं फ्रूट, इस जीवन का नाम है
12. दुनिया से दिल न लगाना, दुनिया है आनी जानी, पलकों की झपक
13. नंदलाला गोपाला मुरलीधर रे, मैं तो निशदिन जपूं तोरी माला रे
दिलजानी
(1935)
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1. भर दे भर दे पैमाना, यह मयखाना तेरा रहे आबाद साक़िया भर दे (सहगान)
2. खुश्क लब तर न करे मय तेरे पैमाने की, चाबियां दे दे मुझे साक़िया मैखाने की (पूरा गीत)
3. जिधर उनकी तिरछी नज़र हो गई, क़यामत ही बर्पा उधर हो गई
4. जिसमें दर्द नहीं वह भी दिल क्या हुआ, वह हुआ न हुआ न हुआ क्या हुआ
5. इस इश्क़ की यारो बला है बुरी, इससे लिपटे ज़माना यह मीठी छुरी
6. आज नजरिया न मारो, नजरिया न मारो, बालम मोरे बांके सैयां
7. तन के न मारो नैन कटारे, कारे कारे यह मतवारे, ये जादू की पुड़िया
8. मौसी छोकड़े की बीबी डोगरे की बोलो राम राम (सहगान)
9. कुंडी सोटा लोटा वोटा पानी वानी लाना प्यारी, आज लगे गहरा घोटा
10. नाज़ में शोख़ी अदा में हम किसी से कम नहीं, जिसको यूं देखा समझ लो
11. ओ माइ डियर मैं तोपे निसार, सदक़े मैं यार हूं बलिहार
12. देखिए इश्क़ में क्या आज मेरा हाल बना, पाए दिलबर के लिए सर मेरा
13. हाय हाय रे इक पैसा रहा ना, हुआ दूर वह ऐश उड़ाना, अब न रही वह
14. बोलो जय जयकार राधाकृष्ण मुरारी बिहारी कन्हाई (पूरा गीत)
कुंआरी या विधवा
(1935)
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1. भारत की दीन दशा का तुम्हें भारतवालो कुछ ध्यान नहीं
2. दर्शन दीजो मुरारी, पल पल विरहन को लगे है भारी
3. बोलो बोलो गिरिधारी, कैसे कटेगी मोरी दुख में उमरिया सारी-सारी
4. न मैं ज़ेवर की भूखी हूं न दौलत की भिखारिन हूं, मेरी स्वामी
5. पिया मत मारो मोहे पिचकारी, संभल जावो विनती कर हारी
6. आंखों में फिरा करती है तस्वीर किसी, याद आती है भूली हुई तक़रीर किसी की
8. जागो जागो भारतवासी अपना सोता देश जगाओ, सोत-ए-2 सदियां गुज़रीं अब तो होश में आओ
9. प्रभु मोरी नैया पार लगा दे, पार लगा दे नैया, क़दम-2 पर भंवर पड़त है
ख़ुदाई ख़िदमतगार
(1937)
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1. जान नादान खेती से सारी बहार है, हो...खेत ही सबका आधार
2. मीठी बोली फिर बोली कोयलिया, क्या प्यारी, क्या न्यारी
3. ये सुना है मैंने जादू है राजाजी के पद पंकज में
4. साक़ी इधर भी जाम, खड़ी हूं आस लगाए
5. खोटी दुनिया बड़ी रंगीली, देख न धोका खाना
6. नहीं ख़तरे से खाली इश्क़ के...छीन लिया दिल आंख मिला के
7. हटो री हार गई गोरी, चली ना चाल कोई तोरी
8. ऐसी छछंदी मैं लुगाई रे, जयरा लागो देवर से (महिला-पुरुष-पुरुष)
9. बस्ती भर में पड़ी है हलचल...जल्द निकल इंसाफ़़ के सूरज
10. कहती है इंसानियत जितने हैं इंसां एक हैं
11. राखो लाज हमारी प्यारे, दिल की बात समझ लो दिल में
12. देखो डगर न छेंको हट जाओ, अब मानो मोरी रे (नृत्यगान)
समाज पतन
(1937)
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1. विधाता कैसा खेल खिलाता, इस जग के सुंदर उपवन में
2. ख़ुशी से फूल रहे हैं फूल, या कि स्वर्ग की दुनिया में कुछ प्रेमी
3. सुन ले चमेली, चतुर अलबेली, सासू के घर जाना री होगा
4. तेरा बीमार-ए-बिस्मिल इस तरह मक़तल में आया था, कि बेड़ी पांव में थी
5. मेरे दिल से कोई पूछे मेरे दुख की कहानी को, तो मेरे मुंह से निकलेगा
6. ऐ जान, तेरे हिज्र में ज़िंदा न रहूंगी, मर जाऊंगी बला से पर दम तेरा भरूंगी
7. सोजा सोजा मेरे बच्चे, अपनी मां के सुंदर सच्चे, उठ कर सुबह
8. मनुआ राधाकृष्ण बोलो, मन में अमृत रस को घोलो, मनुआ
9. पी लो शराब मज़ेदार, ऐ यारो पी लो शराब मज़ेदार, पी कर प्याला हो मतवाला
10. है प्रेम का पंथ निराला, है निराला, है निराला, है निराला, जग में
11. दर्द-ए-दिल क्या मैं कहूं कैसी है हालत मेरी, दर्द-मंदों की ये कहानी है
12. सदाचार व्रत धार लो अबलाओ बहन, मेरी प्यारी बहन भज लो प्रभु का नाम
13. रे लोगो, दुनिया एक बाज़ार, पाप पुण्य की खुली दुकानें बिधना बेचनहार
14. जागो जागो भारतवासी, एक दिन तुम थे जगद्गुरू, जग था उन्नत अभिलाषी
कर्मवीर
(1938)
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1. हर हर गंगे, तू पार उतारनहारी, एक नाम तिहारो कोटि पाप क्षयकारी
2. आफ़त जो सर पे आए तो हिम्मत न हारना, सच्चाई की तलवार से
3. घिर आई घटा घनघोर, नाचे मोर री, करे दादूर पपीहरा शोर
4. गोरी तोरी बर्छी सी री नज़रिया, जियरा सले ना, गाल ऐसे हैं जैसे कचौड़ी
5. नमामी भवानी महातेजदानी, अतुलित गुणचयखानी अनुपम विधानी
6. गूंजे अलबेला, भंवरा बावरा बावरा, लूटे नवरस कलियों का (महिला सहगान)
7. जय जय जय अंबे, अंब भवानी नितसुखरानी, गुणखानी, सुमुखे
8. रीति तेरी नई नई प्रीति लगाके छोड़ दे, यह भी कहां का खेल है
9. नहीं नर-तन बारंबार, ज्ञानी, भजगोविंदम् बड़े भाग मनुष -अवतार
10. सारे देशों से है न्यारी, प्यारी भारत मात हमारी, क्या निखार
11. प्रेम कली को प्रेम बिहारी, प्रेम सिखा देना, प्रेम नगर का भेद न जानूं
12. दुनिया उल्टे खेल खिलाती, धर्मी को कोड़े खिलवाती
13. चाल चाल मारे लागणिए, नयणोंरा लोभो रे मेड़े चालेनी
14. प्याले पे प्याले चलें भर-भर के, साक़ी पीने दे ज़रा जी भर के