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गीत सूची
सीता
(1934)
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1. सुनाऊं बहुत दिनों की बात, जनक राजा के राज भवन में
2. बन से लौटे हुए तुम राजा, प्रजा हुई सुखारी, इतने दिनों के बाद
3. प्रिय आओ सीते! मां की गोद भरो, दुखिया मां तुम बिन तड़पत है
4. मन छोड़ चिंता कल्पना, सब शोक लोक के त्याग तू
5. बंदों रघुपति करुणानिधान, मिटे स्वप्न के दुख महान
6. सीताराम-3, मनुआं भज ले सीताराम, निपट निदान निबल नर को
7. जय राम! जय राम! जय राम! जय राम! जय प्रजा वत्सल (सहगान)
8. कहां है सीता, कहां है सीता, कहां है सीता रामदुलारी, निर्जन बन है (शीर्षक गीत)
9. हे स्वर्ण मूर्तिबाला! जागो जग जागो, हे प्रेम के प्रतिमे, जागो अब जग जाओ
10. जिस तरह राम का घोड़ा आज क़ैद हो गया महाराज
11. नील कमल सम चरण तुम्हारे, इन कमलों को तव यह मन के रहि प्राणों में
12. हे सति! आओ! विश्वमोहिनी आओ-आओ, युगल भुजा के
13. शुभ समय आज आया, नदी पर्वत बन लता कुंज में फिर वसंत छाया
14. परम गहन माया प्रभु तेरी, जीव कहां व कहां फिर आया
15. हे शंकर अभयंकर, रुद्र रूप धरे प्रलयंकर, व्याकुल पुत्री के लिए
धर्मात्मा
(1935)
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1. प्रेम ब्रज बिहारी प्रेम है पुजारी, जगत प्रेम क्यारी, प्रेम मग्न सारी
2. सब कहते जिसको नीचा, उसको माता क़ुदरत ने खुद अमृत देकर सींचा
3. यह जग की फुलवारी प्रभु जी, नाथ सूचना सभी तुम्हारी
4. रोटे बुरे न होते भैय्या, हैं ग़रीब की न्यामत, खोटे वह अमीर को हों
5. जन प्यारे सब तुम्हें, एक सी नज़र है दीन-नाथ की
6. प्रभो, सहारे एक तुम्हीं हो, लाज तुम्हारे हाथ हैं
7. काना रे आज आ ज़रा, मिसरी माखन खाये, बांसुरी बजाये जा
8. आज भाग जाग गए लोगो हमारे, हमसे अनाथ घर, नाथ पगु धारे
9. नारायण नर के रखवार, कौन बिगाड़ करेगा तेरा
10. यह समता बरत हमारा, है खांडे की सी धारा
11. धन्य धन्य नारी जाति गुरु सम सुख दैनी मधु बैनी
12. तन को साफ़ मन को साफ़ कर ले हरि प्यारे
13. है बोली अमृत सी, मां के नाम के जादू से सब
14. कैसे बयां करूं प्रभो, क्या क्या बढ़ाई आपकी, है दोस्त-दुश्मन सब पे ही
15. चरण कमल में प्रभु के माथ नमाऊं आज, करके कृपा भक्त को
16. यदि चाहो भारत बन जावे स्वर्ग सुखों का कानन, दीनों को दो सेवाधन
जंग बहादुर
(1935)
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1. मरती हम मर्द पे मर्दो को ख़बर कुछ भी नहीं
2. ऐसी बतियां मत बोलो बलमा यों दिल को मत तोड़ो
3. वादा करके सनम सुध क्यों बिसारी कहो
4. बिधना किससे कहूं अपना दुखड़ा, जब से पिया तुमसे शादी हुई
5. मूए मर्दुए तू है मेरा खसम, तू भूली या तुझको हुआ है वहम
6. सुधरा माधुरी बगिया लगी है प्यारी प्यारी, मीठी-मीठी
7. छोड़ दे बैयां कलैया न मुर जाय रे, साची ये बतियां काची ये छतियां
8. करम क्यों खोटो बनायो मेरो राम, हूं दुखियारी जनम-जनम की
जीवन नाटक
(1935)
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1. हो सावधान, हो सावधान, बस, क़दम न आगे घरना वर्ना आगे चल
2. सोओ सुख नींद से तुम लंबी तानने वाले, पेट भर खा के
3. आहा, आहा, कैसा मज़ा हुआ राम, अब तो सब ही बने है ग़ुलाम
4. फिर लौट चलो क़ुदरत की और, जहां जा रहे हो पागल बन
5. त्वमामि देव: पुरुष: पुराण स्त्वमस्य विश्वस्य परं निधानम्
6. रोते क्यों हो ? क्या है दुख ? कैसे ये दर्द ? क्यों मैला वेश
7. पगले, बाहर क्यों नहीं आता, चंद्र ज्योति से दमक रहा जग
8. भागी गई प्रेम बन को मैं, लेने सुंदर प्रेम के फूल
9. मनुआ, क़ुदरत की सब माया, उसने तुझको पाला-पोसा, तूने उसे
शादी की रात
(1935)
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1. औरत इस दुनिया की औरत खासा एक तमाशा है, कोई न नर जन्मा
2. तुम झूठी, नहीं मैं सच्ची हूं, तुम ग़लत सही से अलग नहीं
3. माननीय जेंटिलमैनों स्वागत आप सबका है, सुनिए आप लोग
4. चाहती हूं मैं ऐसे पति को जो हो सुंदर नाज़िर, सीधी ऊंचा
5. हम सभी आदमी हैं पसंद के लायक, बाहुनर हमीं हैं अल खाविंद के (सहगान)
6. नहीं चाहती मैं इनको इनमें एक दोष बड़ा है, इनके हुनर बगीचे में (सहगान)
7. नहीं चाहती मैं तुमको भी हो न पसंद हमारे, सबसे एक बड़ी खामी (सहगान)
8. तुममें एक बड़ी खामी है स्वामी न हो सकते तुम मेरे, नापसंद तुम (सहगान)
9. सचमुच आप बड़े सुंदर हैं पूर साइल माइल, लेकिन आपकी दाई आंख (सहगान)
10. ओ फ़ादर मजबूर करो मत शादी नहीं तुम्हारी, ये ठिगना है लव मेकिंग में
11. हाय, हाय, इक औरत ने काट ली नाक हम सबकी, बुला के जमनादास ने
12. काश्मीर का पंडित हूं मैं मशहूर गवैया, मामूली गवैयों सान है मेरा रवैया
13. ओ ख़ून-ए-नाहक सूरत वाले खिचड़ीमल गवैये, आप पसंद नहीं हैं (सहगान)
14. मुझको बेइज़्ज़त कीना मैं बदला इसका लूंगा, जमनादास सेठ को पूरा कोरट में
15. काशी के हैं सेठ हमारे सिल्क बनाने वाले, हैड ऑफिस बंबई, दिल्ली (सहगान)
16. अपने हम सेठ की दौलत का क्या बयान करें, दान दो हाथ से करें और न (सहगान)
17. शादी करो शादी करो शादी करो सनम, पाओगी कभी फिर न बेमिसाल है अदम
18. कमला तुमने सुन ही लिया सब मेरे गुन का गान, सावधान हो अपना निश्चय
19. जा दोजख में तू और तेरे गहने कपड़े सारे, जीत न सकता तू (सहगान)
20. पकड़े रहना, पकड़े रहना हिम्मत को मत खोना, हम रस्से से बचा रहे (सहगान)
21. हम हैं फ़िल्म आसमां के तारे जहां में आशिक़ बहुत हमारे (सहगान)
22. हम सब हैं बेवकूफ चूंकि करें न पेशा ऐसा, फ़िल्म बनाकर (सहगान)
23. ये सेठ शर्मसार दिल-ए-शाद बेगुनाह, फिर है तमन्ना नाम की
24. मैं हूं मुकम्मिल इन सब फ़नों में ऑफर की न
25. कहेगा कौन इसे कमला, है छोरी मारवारी की गांव की (सहगान)
26. जज साहब इमानदार, इंसाफ़ साफ़ हैं करते
27. इस अदालत के हैं कानून कड़े और बड़े, केस के साथ हो इंसाफ़
28. जुर्म हो गया सहज में साबित हारी मुजरिम कमला
29. तू ऐसी भारत की बाला, लिया विदेशी फ़ैशन काला (सहगान)
30. छी छी छी छी ऐसी तू औरत हो गई बेग़ैरत (सहगान)
31. भारत की सती की महिमा न्यारी, सती के पति की दक्ष यज्ञ में
32. आओ हे स्वर्गवासी लो उद्धार नर्क से मुझको
33. तू नारी नहिं है नारी अपमान, भारत की नारी सा तुझमें है न ज्ञान (सहगान)
34. कमला हमें बरेगी, नहीं, वो मुझे पसंद करेगी (सहगान)
35. जुगल जोड़ी की यह शादी मुबारक हो मुबारक हो (सहगान)
अमर ज्योति
(1936)
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1. करते रहना मस्मार दुनिया जुल्मोजफ़ा की, फिर से बसाओ संसार
2. जीत ज्योति तेज दमक रहा है, बिजली-सा उजा हो चमक रहा है
3. सुनो सुनो वन के प्राणी, बनी हूं आज तुम्हारी रानी
4. ये जोगन खोजन निकरी है, निस दिन तड़पती फिरी है
5. आज हमें बन बेहद भाता, दिखीं सभी वस्तु अति सुंदर
6. अब मैंने जाना है, हाय प्रेम क्या है, अगर हम जानते कि इश्क़ दर्द देता है
7. भूल जा भूल जा भुलाऊं कैसे, भूलना मुहाल, भुला दो मुझे
8. अंखियन के तुम तारे प्यारे, छोड़ मोय मत जा रे
9. कार्य की ज्योत सदा ही जरे, एक जन जाये दूजा आये
10. कहतीं कलियां रस भरी
11. मेरे प्रभु जी! मत बिल्माओ जी
दिलावर
(1936)
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जागरण
(1936)
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1. समझा जिसको मौत वो है जीवन की रेखा, जीने का आनंद सदा मरने में देखा
2. भारत के धनवानों, दिल में रखते हो गर शर्म हया, देश दरिद्र तुम्हारा है (सहगान)
3. हंस हंस ऐसे पिया को प्रेम के फंदे में फांसना है
4. प्रभुजी, तव प्रभुताई, बरनी न जाई, ऋषि मुनी गाई (नृत्य गीत)
5. सेवक रख लो जी, प्रभो! हमें सेवक रख लो जी
6. हुआ नारी का कैसा हाल, एक दिन उसके चरणों पर चढ़ते पूजा
7. कान्ह रसिया ले गयो रे, मेरी सोनेरी रूपेरी कांग (नृत्य गीत)
8. प्यारे ललना, झूलो पलना, तुम बिन माता पावे कल ना
9. मचावे हिया पिया पिया का शोर, कारे कारे बदरा प्यार, छाई घट घनघोर
10. इक बाग़ में फूल का सुंदर सा छोटा सा पेड़ महकता था
11. इस दुनिया के कितने प्राणी बिना मौत मर जाते हैं
12. देता जागरण संदेश, जागे जल्द भारत देश (सहगान)
राजपूत रमणी
(1936)
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1. आते हैं श्रीमानसिंह सेनापति जो जग जाने हैं (नमन)
2. आई सखी, क्या बहार है, क्या बहार है, क्या बहार है, गुलेज़ार है
3. रे कायर मन, क्यों करे तू स्वारथ का शोक, मंगल त्याग (प्रार्थना-आरती)
4. तेरी सारी शेख़ी देखी, लंबी बातें करने वाले, चल बे, चल बे, बात बहादुर
5. ये दुख की घटा है छाई, बहन की मत बिलमाई, लाख कही पर एक न मानी
6. प्रभू के नाम पे हमको भी कुछ दिलाएं जनाब, ग़रीब-परवरी करना है बड़ा भारी सवाब
7. घड़ियां आई सुखदाई, व्रत का फल पा लिया
8. भरा उमंग से खिला था चमन में इक फूल, ख़ुशी के रंगो-बू की मस्ती से (महिला)
9. अब प्यारे प्यारे आवेंगे आनंद दिन, हट जावेंगे कारे बदरवा
10. हे शिव प्रभो, विनय सुनो, सदय बनो, तनिक विलम न करो
11. आ रहा रसन्हाया, मनभाया सा प्यारा रविराया
वहां
(1937)
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1. पियो पियो पियो मधुरस की भरी प्यासी, लाला ढाली
2. है दुनिया में पाप ग़ुलामी, जिसमें जीवन है रोना, पशु-सा पच
3. मुझे न भेजो नदी किनारे, सिर पै भारी गगरी, पथरीली पटरी
4. मंगल जंगल में रहता है, मां क़ुदरत के अंचल में, सुख-शांति सोत बहता है
5. हर गली में हैं बगीचे, फूल फल हैं सब रस रस रस, बागबां अरजी सुनो..
6. मालिन बैठी परबत चोटी पे, छोड़े सर्द सांस, भर ख़ुशबू वैं वैं वैं
7. चमकती हाथ की चूड़ी चमाचम, पैजनिया पैरी की बोल छमाछम
हिमालय की बेटी
(1938)
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1. ओम् कैलाशपति, शिव कैलाशपति, हर कूमती, दो सुमती
2. जाओ जाओ मोक्ष-पथिक, खुल रहा है मुक्ति द्वार
3. देखो देखो री सजनी, बाग़ों में आई बहार, नाहीं-नाहीं री सजनी
4. भंवरा गुन गुन गूंज रहा है, फूलों की चहुं ओर छटा है
5. जटा जूट माथे गंग कलक कत् शीश चंद्र लीलाट झलक कत
6. प्रेम पुजारी प्रेम पुजारन, मिलकर कर लें प्रेम का पूजन
7. मत छूना हरगिज़ परनारी, तेग दोधारी, परनारी भाई रावण को
8. सवाल, मरने जीने का सवाल, जिस मन को तू मित्र मानता
9. नदिया किधर बही जाती, नदिया, नदिया, नदिया, नदिया, कल कल
10. देवदासी, देवदासी, देवदासी, हार गया इस जीवन से, अब पाऊं कहां देवदासी
11. सिद्धराज जागो आज, बड़ी है बिपत गाज, बिगड़े बनाओ काज
दुर्गा
(1939)
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1. तुम नाचोगे हां, हम गाएंगे, मन करेगा कोई जो हमको नहीं सुनेंगे
2. ना कोई बाप का पूत किसी का, फिर काहे को रोना है, उमर भर किसे
3. नदी पार है आम की बगिया, हरे खेत हैं बढ़िया बढ़िया, छिप-छिप कर
5. अरे कर्ज़दारो न गफ़लत में रहना, वसूली के दिन को भी सर पे समझना
6. बालापन के मेरे साथी, ठाढ़े बुलावें री, अब क्यों न आती
7. अब जागो राधा रानी, रैन गई अब हुआ सवेरा
9. कौन बैरी है कौन है मीत, जगत की झूठी ममता-प्री, आज जिन्हें तुम
कंगन
(1939)
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1. जल भरने चली री गुइयां, जमुना किनारा चंचल धारा
6. क्यों बजे हृदय वीणा के तार, मुरझाई मन की बगिया में
9. राधे, वंशी रही पुकार, मथुरा जाते नंदकुमार, राधे
10. बंदे, नाव का लंगर छोड़, उमड़ी तेरी नैन की नदिया
11. जोगन भटक रही है बन बन, वाको पाने, जा को देना
12. मरण रे, तू ही मेरो श्याम समान, घोर घटा का मोर
नवजीवन
(1939)
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अपना घर
(1942)
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1. अपना घर, अपना घर, अपना देश है अपना घर, देश के जितने दीन और दुखिया. . . (शीर्षक गीत)
2. वह नहीं है, नहीं है नहीं है, अपना घर, वह हरगिज़ नहीं अपना घर. . . (शीर्षक गीत)
3. नाचत आया बन मोर, मनमोहन सावन मोर, काली बदरिया गोरी बिजुरिया. . .
4. तू सो जा लाल हमारे, अपनी माता के प्यारे, आकाश की परियां ले बलैयां. . .
5. हमेशा खिले रहें ये फूल, आनंद कंद, कविता के छंद, बालक अमृत के मूल. . .
6. पानी के राजा मछेरिया हो, महेरिया हो, नदी पे जाना जाल बिछाना, मछली पकड़ना पतरिया हो. . .
7. मजे में आज ख़ूब चहक रही है चिरैया, अपनी मस्ती में ख़ूब बहक रही है चिरैया. . .
मामाजी
(1942)
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1. आज मैंने प्यारा सा प्रीतम पाया, हम दोनों हैं काया छाया, आज मैंने प्यारा सा. . .
2. के सांझी भैना री हम कुंवारी कन्या हैं हमें वर देना री, जय जय जयश्री शिव की पटरानी. . . (महिला-साथी)
3. कली के अंदर बंद हुई, रोती सुगंध होती उदास, हाय राम मुझे नहीं मालूम कैसी है हवा कैसा प्रकाश. . .
4. आवो साजन आज, पलंग पावड़े बिछा दिये हैं, तुम बिन सूना महल है ये मन का. . .
5. मेरी खेती माता, अन्न बसन धन जन की दाता, तू ही सब देती मेरी खेती माता. . .
6. सखि हम तो चलीं पनघट पर, जल बरने जमुना तट पर, सखि हम तो चलीं पनघट पर. . .
7. गोरी देखा है तुमको जब से, बेचैन हुआ मन तब से, का बताई कि मेरे दिल में यह का होवत है. . .
8. साजन आए दुआर हमारे, हृदय का प्याला उफ़न पड़ा क्यों, नैन से नीर बहा रे. . .
9. आते देखे जभी गिरिधारी, छुप गई राधिका प्यारी, अब छुप कर क्या हो गोरी सखी लिया मैंने पहचान. . .
10. आरती आरती सब मिल कर गावो आरती, प्रभु जी रुद्र रूप धर आवो, आरती आरती. . .
11. प्राणो की प्रीत भी तो गुनहगार हो गई, फूलों की गंध भी तो गिरफ़्तार हो गई. . .
12. आज मेरे, आज मेरे, जीवन का प्यार हो, हां हां हां प्यार हो. . .
13. खोलो मन के बंधन खोलो, दुखिया के आंसू से मन के काले दाग़ों को धो लो. . .
महात्मा विदुर
(1943)
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1. अंखियां प्रभु दर्शन की प्यासी, व्याकुल होकर बाट निरखती, निशि दिन रहत उदासी. . .
2. यदि तुम संकट में घिर जाओ, हरि की शरण लो न घबराओ, दुख जायेंगे बीत तुम्हारे. . .
3. तुम नयनों के तारे प्यारे, तुम नयनों के तारे, भैया मोरे राजदुलारे तुम, तुम नयनों के तारे. . .
4. हर काम में रहते प्रभु हमारे, हरे मुरारे, हरे मुरारे, माता खेती सब कुछ देती. . .
5. अंखियन में नींद समाई, धुन कृष्ण-कृष्ण मन भाई, अंखियन में नींद समायी. . .
6. प्रभु तुम्हारी दया से कितने अनजाने पहिचाने, मैंने अनजाने पहिचाने, आज बन गए हम दोनों ही. . .
7. जगत में खिली प्रेम फुलवारी?2, प्रेम का मंदिर प्रेम की सूरत प्रेम को पूजे पुजारी. . .
8. सुनाऊं-सुनाऊं एक सुरीला गान, जिसकी मधुर मिलन है तान, सुनाऊं सुनाऊं. . .
9. बाट तकै तुमरी मनमोहन, ब्रिज की चंद्रावली?2, कुंज कुंज में डोले राधा बेसुध बावली. . .
10. सूखे जीवन में जोबन समाया जोबन समाया, जैसे पतझड़ में सावन-सा आया. . .
11. मतवाले रे मतवाल-ए-मतवाले, उठियो रे, उठियो रे सोने वाले, मतवाले रे मतवाले. . .
12. पायो री, पायो री, मैंने कृष्ण रतन धन, माथ मुकुट तन पर पीतांबर मुख मुरलीधर आयो री. . .
13. कित जाय छिपे सांवरिया, सांवरिया हो, कित जाय छिपे, कित जाय छिपे सांवरिया हो सांवरिया . . .
श्री रामानुज
(1943)
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1. जाको राखे सांइयां, मार न सकता कोय, अंग न वाका छू सके जो जग बैरी होय (पूरा गीत/पुरुष)
2. जय-जय-जय वरद राज की जय, सबके वरदाता राजा वरद राज की जय (पूरा गीत)
3. पी का पता बता दे, अरे कोई, गोपी पूछ रही तुमसे तुमरो घर, उनको ही जाय जतावे. . .
4. ना कोई नीचा, ना कोई ऊंचा, सारा जग है प्रेम बगीचा, एक पेड़ के फूल हैं हम सब. . . (पुरुष)
5. यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत:, अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्. . . (पुरुष)
6. भज मन, निशि दिवस हरिचरण, छोड़ जग जंजाल भैय्या, जा तू वाकी शरण. . . (महिला-पुरुष)
7. हुआ सवेरा, मूरख अब तो जाग र-ए?4, सोया नींद में क्यों मदमाता, मिटा अंधेरा जाग रे. . . (पुरुष)
8. गावो होकर मगन, सब मिल के सजन, गावो आरती हरि की आरती हरि की. . . (महिला-पुरुष-साथी)
9. बंधु पायो जनम-जनम को, दुनिया के दुख हरने वाला, गिरों को गले लगाने वाला. . . (महिला-पुरुष)
10. पी की शोभा कहत लजावे, मेरो मन शोभा कहत लजावे, सिर पे मुकुट तिलक माथे पे. . . (महिला-2 पुरुष)
11. न कोई है बैरी, न कोई है प्यारा, एक परिवार जग सारा हमारा, तू राजा हमारा. . . (पुरुष-साथी)
12. दे डाल प्रभु के बंदे, सब दे डाल, दे डाल ये सब माया, माया वालों को दे जडाल तू ये काया. . . (महिला-पुरुष)
13. जुग बीते, वेदांत शास्त्र में, कही गयी ये बात, मुक्ति मंत्र मत दो अशांत को. . . (महिला-पुरुष-साथी)
14. जय-जय-जय हे रामानुज प्यारे, दीन दुखी के दुख देखे और रोये प्राण तुम्हारे. . . (महिला-पुरुष-साथी)
15. मेरे मोहन, हृदय के धन, वर्षा भरे मग में, मैं हृदय बिछाऊं पग में, आओ यहां भूल के प्यारे. . .
16. हम तो चले प्रेम की दुनिया बसाने, प्रेम जगाकर सारे जगत् को प्रेम का तीरथ बनाने. . . (सहगान)
17. अरे ओ निर्मोही, मत जा. . .
सुलह
(1944)
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1. ना घबराना, ना घबराना, दुख आए तो ना घबराना, बस हरि से नेह लगाना. . .
2. रुनझुन-3 पायल आज बजाय जा, मन की फुलवारी में हंस हंस आज वसंत मनाये जा. . .
3. मानूं मैं हार तोसे मानूं मैं हार, मिलेटरी सजनिया छोड़ तक़रार, भोले सजनवा पाछे पाछे हमारे. . .
4. रात दिनों के कामों से जब थोड़ी फुर्सत पाओ, आवो नगर निवासी भाई, गांवों में आवो. . .
5. अपने पुजारी की सुध लेना, भूल न जाना प्यारे, फिर मुखड़े के दर्शन देना, भूल न जाना प्यारे. . .
6. आओ तुम्हें रंग से आज नहला दें, ठहरो तुम्हें नर से नारी बना दें. . .
7. बढ़े चलो. . .
8. प्रीतम मेरे आज आए, आए आए प्रीतम मेरे आज आए, प्रीतम मेरे आए, धीरे धीरे मन आंगन में. . .
देवदासी
(1945)
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1. को तुम, को तुम बोलो मोय, मन में जाग रह्यो तू छन छन, बठ्यों पलकों पर कर आसन. . . (लंबा गीत)
2. मेरे रूप में निखार, तेरे दिल में प्यार है, जीवन हज़ार तुझपे ये जोबन निसार है. . .
3. नटखट सी रसीली राधिका, हां राधिका, गोरे कान्हा का दिल लिए जाये रे. . .
4. तुम्हीं सब कुछ हो मेरे नाथ , मैं और किसी को नहीं जानूं, दिन रैन मगन मन तुममें. . .
5. जै राधे, श्री राधे राधे, राधे गोविंद राधे, श्याम गले वनमाला विराजे राधा गले मोती साजे. . .
6. तोता बोला मेरे कान्हा कहलाते मनमोहन, बोली मैना वो मोहन हैं राधा जितने फन. . .
7. जै-जै-जै-जै गोविंद, जै मुकुंद गिरधारी, कृष्णचंद, राधानंद ब्रज के बिहारी. . .
8. मैं छमा आपसे चाहूं, चलत-ए-2 जीवन पथ पर, पीछे रह जाऊं मैं थक कर. . .
9. हरी के नाम बिना रे, राधा नाम बिना रे, जनम मनुष का बिरथा बीते रैन दिना रे (पूरा गीत)
10. हरे मुरारे मधुकैटभ हारे, गोपाल गोविंद मुकुंद शौरे. . .
11. रोएं हम चरणों पे भगवान तुम बैठे मुस्काओ, हम दुखियों के आंसू से तुम अपना मन बहलाओ. . .