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🎵 गीत

4. शेर का हुस्न हो, नग़में की जवानी हो तुम, इक धड़कती हुई शादाब कहानी हो तुम...

4 Sher Kaa Husn Ho, Naghamen Kee Javaanee Ho Tum, Ik Dhadakatee Huee Shaadaab Kahaanee Ho Tum

फ़िल्म

चंबल की क़सम
1979
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श्रेय

गायक/गायिका मु.रफ़ी
संगीतकार ख़य्याम

रिकॉर्ड विवरण

माइक्रोग्रूव / एलपी / ईपी LP No. ECSD 5591