🎵 गीत
5. इस शान से वो आज पए-इम्तहां चले, कितनों ने पांव चूम के पूछा कहां चले. . . (क़व्वाली)
5. Is Shan Se Vo Aj Pae-Imtahan Chale, Kitanon Ne Panva Chum Ke Puchha Kahan Chale . . . (Qawwali)
श्रेय
गायक/गायिका
शेख़ अहमद क़व्वाल, साथी
Sheikh Ahmad Qawwal, Others
संगीतकार
अज़ीज़ ख़ान मस्ताना
Aziz Khan Mastana
टिप्पणी
मजरूह सुल्तानपुरी के अनुसार, इस क़व्वाली में शामिल एक शे'र - जब मैं चलूं तो साया भी मेरा न साथ दे, जब तुम चलो ज़मीन चले आसमां चले - जलील मानिकपुरी का लिखा हुआ है.