🎵 गीत
5. बुझ गए आशाओं के दीपक, सब सपने मुख मोड़ गए, लूट के अरमानों की बस्ती अकेला छोड़ गए . . .
5. Bujh Gae Ashaon Ke Dipak, Sab Sapane Mukh Mod Gae, Lut Ke Aramanon Ki Basti Akela Chhod Gae . . .
श्रेय
गायक/गायिका
अमीरबाई कर्नाटकी
Amirbai Karnatki
गीतकार
वाहिद क़ुरेशी
Waahid Qureshi
संगीतकार
फ़िरोज़ निज़ामी
Firoz Nizami
रिकॉर्ड विवरण
78 आरपीएम रिकॉर्ड
GE 3921