🎵 गीत
8. अब लब पे कहानी कोई नहीं, अब लब पे फ़साना कोई नहीं, तुमने तो मुझे वो ग़म बख़्शा जिस ग़म का ठिकाना कोई नहीं. . .
8. Ab Lab Pe Kahani Koi Nahin, Ab Lab Pe Fasana Koi Nahin, Tumane To Mujhe Vo Gham Bakhsha Jis Gham Ka Thikana Koi Nahin . . .
टिप्पणी
इस गीत की अंतिम पंक्तियों (दुनिया में हरेक बेगाना 'बहज़ाद' यगाना कोई नहीं) में गीतकार ('बहज़ाद') का नाम आया है.