🎵 गीत
9. यह जो दो आंखों का बाहम मेल है, मेरा क्या है पुतलियों का खेल है, कै घड़ी यह बादल. . .
9. Yah Jo Do Ankhon Ka Baham Mel Hai, Mera Kya Hai Putaliyon Ka Khel Hai, Kai Ghadi Yah Badal . . .
टिप्पणी
इस गीत की अंतिम पंक्तियों ('आरज़ू' कब तक जवानी की उमंग ...) में गीतकार का नाम 'आरज़ू' आया है.