🎵 गीत
4. मुजरिम हूं मुहब्बत का, जो चाहे सज़ा देना, पर याद रहे इतना दिल से न भुला देना. . .
4. Mujarim Hun Muhabbat Ka, Jo Chahe Saza Dena, Par Yad Rahe Itana Dil Se Na Bhula Dena . . .
रिकॉर्ड विवरण
78 आरपीएम रिकॉर्ड
FT 15442
टिप्पणी
यह गीत वाडिया मूवीटोन द्वारा ही निर्मित आंख की शर्म (1943) में पुनः शामिल किया गया था.
याक़ूब
आग़ा