🎵 गीत
9. आह को चाहिए इक उम्र असर होने तक, कौन जीता है तेरी ज़ुल्फ़ के सर होने तक. . .
9. Ah Ko Chahie Ik Umr Asar Hone Tak, Kaun Jita Hai Teri Zulf Ke Sar Hone Tak . . .
टिप्पणी
इस गीत अंतिम पंक्तियों (ग़म-ए-हस्ती का असद किससे हो जुज़ मर्ग़-ए-इलाज) में गीतकार का नाम 'असद' (मिर्ज़ा असदुल्लाह बेग ख़ान ग़ालिब) आया है.