🎵 गीत
7. मासूम नज़र का भोलापन, ललचा के लुभाना क्या जाने, दिल आप निशाना बनता है. . .
7. Masum Nazar Ka Bholapan, Lalacha Ke Lubhana Kya Jane, Dil Ap Nishana Banata Hai . . .
रिकॉर्ड विवरण
78 आरपीएम रिकॉर्ड
N 16670
टिप्पणी
इस गीत अंतिम पंक्तियों (हम आरज़ू आए बैठे हैं और वह शरमाए बैठे हैं) में गीतकार का नाम 'आरज़ू' आया है.