🎵 गीत
2. हुस्न के बादल छाए हैं और दर्द की बिजली चमक रही है
2. Husn Ke Badal Chhae Hain Aur Dard Ki Bijali Chamak Rahi Hai
श्रेय
गीतकार
मुंशी नाज़ां
Munshi Nazan
🎬 परदे पर
परदे पर मुख्य
सरदार अख़्तर