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🎵 गीत

9. वो शोख मुंह से जो पर्दा उठाए जाता है, सर-ए-बाज़ार क़यामत ही ढाए जाता है

9. Vo Shokh Munh Se Jo Parda Uthae Jata Hai, Sar-E-Bazara Qayamat Hi Dhae Jata Hai

फ़िल्म

हातिमताई-IV
1933
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श्रेय

गीतकार जी आर सेठी
G R Sethi
संगीतकार माधुलाल दामोदर मास्टर
Madhulal Damodar Master