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अचानक

Achaanak
वर्ष1973
बैनररूपम पिक्चर्स, बम्बई
श्रेणीसामाजिक
रिकॉर्ड कम्पनी

सहायक संगीत निर्देशक

वसंत आचरेकर सेबेस्टियन

निर्देशक

गुलज़ार

टिप्पणी

इस गीतविहीन फ़िल्म में समाज की एक समस्या को दर्शाया गया है जिसमें मेजर रंजीत खन्ना जब अपनी पत्नी को अपने मित्र के प्यार में खोई हुई देखता है तो वह दोनों का ख़ून कर देता है ख़ून के जुर्म में अदालत मेजर रंजीत को फांसी की सज़ा देती है इसी शीर्षक (Title) से सन् 1998 में भी एक फ़िल्म सेंसर बोर्ड द्वारा पारित की गई थी