मिल, दि
कलाकार
निर्देशक
संगीत निर्देशक
फ़िल्म सेंसर और बम्बई में रिलीज़ जानकारी
Cens No=Punjab/133 Len (ft)=13994 Reels= Time (mts)=155 Date=00.00.1934
टिप्पणी
फ़िल्म क्षेत्र में लेखक के रूप में अपना भाग्य आज़माने मुंशी प्रेमचंद बंबई (31 मई 1934 से 4 अप्रैल 1935 तक) पहुंचे और लेखन हेतु एक वर्ष के लिए फ़िल्म निर्माण कंपनी 'अजंता सिनेटोन' से अनुबंध करने के बाद उन्होंने एक कहानी 'मज़दूर', जिसमें मुंशी प्रेमचंद ने एक छोटा-सा रोल भी निभाया था, लिखी. निर्देशक एम. भवनानी ने इस कहानी को लेकर फ़िल्म 'मिल' बनाई लेकिन तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने, मिल मालिकों एवं मज़दूरों में संघर्ष होने का अंदेशा जताते हुए, लाहौर (पंजाब) सेंसर बोर्ड द्वारा 1934 में पारित होने के बाद 2 वर्ष के लिए प्रतिबंधित करके फ़िल्म को प्रदर्शित नहीं होने दिया था. बंबई सेंसर बोर्ड ने भी इस फ़िल्म (12750 Ft/13R) को 31. 01. 1935 को देखने के बाद 05. 02. 1935 को प्रमाणपत्र देने से इन्कार कर दिया था. इसके बाद कुछ संशोधनों के साथ यह फ़िल्म (13000 Ft/13R) परिवर्तित 'सेठ की लड़की' नाम से बंबई सेंसर बोर्ड को पारित किए जाने हेतु 19 मार्च 1935 को फिर से प्रस्तुत की गई लेकिन सेंसर बोर्ड ने उसी दिन इसे सर्टीफ़िकेट देने से इन्कार कर दिया. बाद में 9 मई 1936 को यह फ़िल्म ग़रीब परवर उर्फ़ दया की देवी (Bombay Censor details : 12237 Ft/136M/14R/16101 (B)/15. 04. 1936) नाम से जारी की गई. बाद में भी यह फ़िल्म सेंसर बोर्ड द्वारा कई बार पारित की गई थी - (1) 'मज़दूर' - 13398 Ft/. . . . M/14R/20567 (B)/31. 03. 1939 but cancelled on 08. 05. 1939, (2) 'मिल' यानी 'मज़दूर' - 13256 Ft/. . . . M/14R/20843 (B)/26. 05. 1939, (3) 'मिल' यानी 'मज़दूर' यानी 'गिरनी' - 11920 Ft/. . . . M/13R/20874 (B)/01. 06. 1939. उस समय फ़िल्म के निर्माण पर एक लाख रुपए खर्च हुए थे. मास्टर फ़िदा हुसैन के अनुसार गीत क्र. 5,7,8,9 लोक गीत हैं, प्रथम गीत मीराबाई रचित भजन है तथा गीत क्र. 6 बिंदू जी का लिखा हुआ है. फ़िल्म हेतु कथा लेखन का कार्य स्वयं मुंशी प्रेमचंद ने किया था.