बड़े नवाब साहब
Bade Nawab Sahb
निर्देशक
निर्माता
गीतकार
संगीत निर्देशक
कलाकार
फ़िल्म सेंसर जानकारी
Cens No=Bombay/29400 Len (ft)=10997 Reels=13 Time(mts)=122m11s Date=01.05.1944
टिप्पणी
मुन्ने आग़ा (लखनऊ)
गीत (10)
1. हमें हैगा भरोसा तेरा, अल्लाह मेरे करियो करम का फेरा, बाग़ भी तेरे बगीचे भी तेरे. . .
1. Hamen Haiga Bharosa Tera, Allah Mere Kariyo Karam Ka Phera, Bagh Bhi Tere Bagiche Bhi Tere . . .
🎤 मुन्नाबाई, साथी ✍️ शम्स लखनवी 🎼 बशीर देहलवी
2. कौन अलबेले किनार झमाझम पानी भरे रे , हाथ रसरिया कांदे गगरिया. . .
2. Kaun Alabele Kinar Jhamajham Pani Bhare Re , Hath Rasariya Kande Gagariya . . .
🎤 मुन्नाबाई ✍️ शम्स लखनवी 🎼 बशीर देहलवी
3. खेल निराले हम खेलें अकेले रे हम तुम खेलें, मैं फूलों के रंग में खो जाऊं. . .
3. Khel Nirale Ham Khelen Akele Re Ham Tum Khelen, Main Phulon Ke Rang Men Kho Jaun . . .
🎤 हमीदा बानो, जी एम दुर्रानी ✍️ शम्स लखनवी 🎼 बशीर देहलवी
4. पास तुम हो तो दिल को क़रार हो, मेरी दुनिया में हरदम बहार है, सूखे टुकड़े मिलें जो बाइज़्ज़त. . .
4. Pas Tum Ho To Dil Ko Qarar Ho, Meri Duniya Men Haradam Bahar Hai, Sukhe Tukade Milen Jo Baizzat . . .
🎤 अमीरबाई कर्नाटकी ✍️ शम्स लखनवी 🎼 बशीर देहलवी
5. जोबन की नैया डोले, ज़रा होले होले होले, चोली मुस्काए रे, जिया मोरा घबराए रे. . .
5. Joban Ki Naiya Dole, Zara Hole Hole Hole, Choli Muskae Re, Jiya Mora Ghabarae Re . . .
🎤 अमीरबाई कर्नाटकी ✍️ शम्स लखनवी 🎼 बशीर देहलवी
6. कटी रैन सगरी हुई भोर, पिया नहीं आए, रहे कहीं और, गोरी काहे मचाये शोर. . .
6. Kati Rain Sagari Hui Bhor, Piya Nahin Ae, Rahe Kahin Aur, Gori Kahe Machaye Shor . . .
🎤 साथी ✍️ शम्स लखनवी 🎼 बशीर देहलवी
7. जाग गई, जाग गई, हमारी क़िस्मत जाग गई, प्रेम नदी में जोश जो आया. . .
7. Jag Gai, Jag Gai, Hamari Qismat Jag Gai, Prem Nadi Men Josh Jo Aya . . .
🎤 हमीदा बानो, जी एम दुर्रानी ✍️ शम्स लखनवी 🎼 बशीर देहलवी
8. छोड़ गए-2 हाए छोड़ गए सब साथ, अकेली मैं तो गई हो, पास पड़ोसी और न सहेली, रात डरावनी मैं हूं अकेली. . .
8. Chhod Gae-2 Hae Chhod Gae Sab Sath, Akeli Main To Gai Ho, Pas Padosi Aur Na Saheli, Rat Daravani Main Hun Akeli . . .
🎤 हमीदा बानो ✍️ शम्स लखनवी 🎼 बशीर देहलवी
9. दो दिन की है ये ज़िंदगी ज़ख़्मों पे ज़ख़्म खाए जा, फूलों में फूल बन के रह कांटों से भी निभाए जा. . .
9. Do Din Ki Hai Ye Zindagi Zakhmon Pe Zakhm Khae Ja, Phulon Men Phul Ban Ke Rah Kanton Se Bhi Nibhae Ja . . .
🎤 हमीदा बानो ✍️ शम्स लखनवी 🎼 बशीर देहलवी
10. क्या हक़ीक़त थी-3, भला इस चर्ख बेबुनियाद की, वो तो कहिए मुझको आदत ही नहीं फ़रियाद की . . .
10. Kya Haqiqat Thi-3, Bhala Is Charkh Bebuniyad Ki, Vo To Kahie Mujhako Adat Hi Nahin Fariyad Ki . . .
🎤 हमीदा बानो ✍️ शम्स लखनवी 🎼 बशीर देहलवी